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देव बाटविला ?

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ठोळा ता. जि. परभणी या गावातील मातंग समाजाचे लोक पावूस पडावा म्हणून मारोतीला नारळ फोडण्यासाठी गेले होते. देव बाटविला म्हणून २६ जुलै २०१४ रोजी रात्री ११ वाजता गावातील लोकांनी मातंग वस्तीत धुडगूस घातला. पावूस पडावा म्हणून नारळ फोडणे हि अंध श्रूधा आहे. अंध श्रूधा घालविण्यासाठी आपण प्रयत्न करायला हवेतच. परंतु कुत्रे मांजरं मंदिरात जातात, आम्ही तर माणसं आहोत, माणसाच्या स्पर्शाने देव कसा काय बाटू शकतो याचा जाब विचारला पाहिजे. मंदिर प्रवेशाची कृती चूक कि बरोबर या पेक्षा गावागावात मानवी हक्काची पायमल्ली होत आहे हे सरकार समोर आणले पाहिजे. स्वातंत्र्याच्या ६७ वर्षात आम्ही पारतंत्र्यात असून, पारतंत्र्य घालविण्यासाठी लाल सेनेच्या वतीने होत असलेल्या मंदिर प्रवेशाच्या आंदोलनात आपण सर्वांनी सहभागी व्हावे हि विनंती. FIR ची प्रत अपलोड केली आहे. अधिक माहितीसाठी पो. स्टे. दैठणा येथे संपर्क साधावा.

नंदीग्राम का कहर

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नंदीग्राम भूमि विद्रोह का असर अब भी कायम है और यह एक ऐसा सिलसिला बन गया है,जिससे भारतीय वामपंथ के निकटभविष्य में उबरने के आसार कम ही हैं।मेदिनीपुर समेत जंगलमहल में वामपंथ का सबसे मजबूत जनाधार पहले ही ध्वस्त हो गया है।विधानसभा चुनावों और पंचायत चुनावों में फिरभी वामपंथियों के वापसी की उम्मीद की जी रही थी।इसी उम्मीद की पूंजी लेकर वाम नेतृत्व परिवर्तन की मांग सिर से खारिज की जाती रही है।वाम जनता की मांगों के विपरीत

बहिस्कृत पूर्व लोकसभाध्यक्ष की वापसी तो पार्टी में नहीं होसकी,बल्कि नेतृत्व के प्रबल आलोचकों किसान नेता रज्जाक अली मोल्ला को बाहर का दरवाजा दिखा दिया गया तो नंदीग्राम त्रासदी का ठीकरा तत्कालीन सांसद लक्ष्मण सेठ पर फोड़ते हुए उन्हें पार्टी से बाहर निकाल फेंका गया। लक्ष्मण सेठ और रज्जाक मोल्ला इस पूरे प्रकरण में एक दूसरे के संपर्क में रहे हैं।

--------एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

जाहिर है कि नंदीग्राम और सिंगुर में जबरन जमीन अधिग्रहण,अंधाधुंध शहरीकरण और पूंजी के लिए वाम सरकार और नेतृत्व की अंधी दौड़ पार्टी के स्रवोच्च स्तर पर लिए गये निर्णय के मुताबिक ही हैं और इस कार्यक्रम को कार्यान्वित ही किया कैडर तंत्र ने,जिसे वाम सत्ता ने गेस्टापो और हर्माद में तब्दील कर दिया था।जमीन अधिग्रहण के मुद्दे को प्रशासनिक तौर पर सुलझाने की जगह पार्टी कैडरों के जरिये असहमत किसानों का दमन उत्पीड़न और नंदीग्राम में नरसंहार की जिम्मेदार भी पार्टी और सरकार दोनो रही हैं।लेकिन पार्टी नेतृत्व ने सरकार और नेतृत्व का बचाव करते हुए सारा दोष लक्ष्मण सेठ और जिला नेतृत्व पर डाल दिया,जिसके खिलाफ बगावत अब विस्फोटक होती जा रही है।

सेठ के निकाले जाने के बाद भी उनकी पत्नी तमालिका माकपा में बनी हुई थी और अब वह भारी धमाके के साथ जिला कमिटी के पूरे नेतृत्व को लेकर पार्टी से बाहर निकल गयीं।पूरे जिला नेतृत्व का पार्टी छोड़ने की यह घटना वामपंथी इतिहास में अभूतपूर्व है।कुल 21 नेताओं के इस्तीफे राज्य कमिटी ने मंजूर भी कर लिये हैं लेकिन नेतृत्व ने दलत्यागियों के सारे आरोप सिरे से खारिज कर दिये हैं।जबकि लक्ष्मण सेठ के मुताबिक पारटी छोड़ देने के बाद निष्कासन हुआ या नहीं,यह किसी के लिए सरदर्द का सबब नहीं है।

बंगाल में 35 साल के वाम शासन के बाद चुनावी हार की वजह से समूचे वाम जनाधार के बिखरने के असली कारणो की पड़ताल करने और उसका निदान निकालने की कोई पहल लेकिन पार्टी नेतृत्व की ओर से हो नहीं रही है।सत्तादल के सत्ता से बाहर हो जाने के बाद भेड़धंसान दलबदल आम है,लेकिन हाल के लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बंगाल में माकपाई विधायक, नेता और कार्यकर्ता जिस तरह तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में शामिल हो रहे हैं,वैसा वामपंथी पराजनीति में कभी हुआ नहीं है।

वामपंथी कैडर सिर्फ चुनावी हार के लिए विचारधारा और प्रतिबद्धता को तिलाजलि देकर धुर दक्षिणपंथी बन जाये,तो भारत में वामपंथी आंदोलन के चरित्र का नये सिरे से मूल्यांकन की जरुरत है। विडंबना यह है कि न पार्टी महासचिव,न पोलित ब्यूरो और न राज्य नेतृत्व इसके लिए किसी भी स्तर पर तैयार है।इसके विपरीत जैसे जेएनयू में भी हुआ,असहमति के स्वर को कुचल देने के रास्ते पर ही चल पड़ा है माकपा नेतृत्व।इससे पहले हालांकि 1996 में कामरेड ज्योति बसु को प्रधानमंत्री न बनने देने के फैसले के खिलाफ उत्तर 24 परगना और कोलकाता जिलासमितियों का विभाजन हो गया था,लेकिन तब भी नेतृत्व के खिलाफ इतने संगीन आरोप नहीं लगाये गये थे और समूचे जिला नेतृत्व ही पार्टी से तब अलग नहीं हुआ था।

वैसे भी कामरेड नंबूरीदिपाद,कामरेड सुरजीत,कामरेड अनिल विश्वास और कामरेड ज्योति बसु के अवसान पर पार्टी नेतृत्व संकट से जूझ रही है और अलोकतांत्रिक ढंग से तानाशाही रवैया अपनाकर मौजूदा नेतृ्व भारतीय वामपंथ का गुड़ गोबर करने में लगा है।

गौरतलब है कि शुरु से ही सभी तबको को नेतृत्व में प्रतिनिधित्व देने की वाम परंपरा नहीं है।दबंग जाति वर्चस्व के खिलाफ लेकिन आवाजें हाल फिलहाल ही बुलंद होने लगी हैं।अब हुआ यह कि बंगाल में राज्य व जिला कमेटी के कामकाज से नाराज होकर पूर्व मेदिनीपुर जिले के करीब तीन हजार माकपा नेताओं, कार्यकर्ताओं व समर्थकों ने एकमुश्त पार्टी छोड़ दी है।इन लोगों ने भारत निर्माण मंच बनाने का ऐलान भी कर दिया।इस मंच के आचरण और भविष्य के बारे में कोई अंदाजा अभी नहीं है।

पार्टी छोड़ते हुए इन लोगों ने बाकायदा पार्टी नेतृत्व के खिलाफ एक आरोपपत्र का प्रकाशन भी कर दिया है और यह भी अभूतपूर्व है। शनिवार को तमलूक के नीमतौड़ी में एक ऑडिटोरियम में पूर्व विधायक तथा हल्दिया नगरपालिका की पार्षद व माकपा के पूर्व सांसद लक्ष्मण सेठ की पत्नी तमलिका पांडा सेठ, पांसकुड़ा के पूर्व विधायक अमीय साहू, नंदीग्राम के नेता व जिला कमेटी के पूर्व सचिव अशोक गुड़िया ने संवाददाताओं को माकपा छोड़ने की जानकारी दी।

तमलिका पांडा सेठ ने कहा कि आज का दिन उनके लिए बेहद दुखद है। इसका कारण है कि आम लोगों के साथ अब माकपा नहीं है। लिहाजा आम लोगों की भावनाओं को देखते हुए पार्टी छोड़ने का उन्होंने फैसला किया है।18 वर्षो से वह पार्टी के साथ थीं। राज्य व जिला कमेटी के नियमों को वह मान कर काम करती थीं, लेकिन नंदीग्राम की घटना को सामने रख कर तृणमूल कांग्रेस आगे बढ़ती गयी, लेकिन माकपा ने कोई कदम नहीं उठाया। नंदीग्राम की घटना में उनके कई नेता व कार्यकर्ता शहीद हुए।कई को घर छोड़ कर बाहर रहना पड़ रहा है, लेकिन पार्टी साथ नहीं खड़ी हुई। नंदीग्राम की घटना में झूठे मामले में फंसा कर उनके कई नेता-कार्यकर्ताओं को जेल जाना पड़ा। पार्टी ने उनकी भी सुध नहीं ली। जिले में पार्टी को मजबूत करने में लक्ष्मण सेठ का योगदान है।लेकिन पार्टी उनके साथ न खड़ी होकर दल से बहिष्कृत कर दिया। श्रीमती सेठ ने आरोप लगाया कि जिला कमेटी का दायित्व रबीन देव को दिया गया। लेकिन उन्होंने उन लोगों को तरजीह दी जो जनता से दूर हैं।


श्रीमती सेठ ने आरोप लगाया कि धमकी के साये तले उन्होंने 18 महीने तक हल्दिया नगरपालिका को चलाया। लेकिन  पार्टी ने बगैर कारण बताये लक्ष्मण सेठ सहित जिले के कुल छह नेताओं को सस्पेंड कर दिया। ऐसी स्थिति में बाध्य होकर वह पार्टी छोड़ने को मजबूर हुईं।

धनगर आरक्षण हक्क कृती समिती

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धनगर आरक्षण हक्क कृती समिती च्या वतीने नांदेड जिल्ह्य़ात सर्व 16 तालुक्यात बारामती येथील उपोषण कर्त्यांचा सन्मानार्थ व उपोषण थांबले तरी आम्ही थांबलो नाही हे शासनकर्ते दाखुन देण्यासाठी मोर्चे काढले हदगाव येथे तहशील कार्यालय वर भव्य मोर्चा काढण्यात आला बायका मुला बाळासह धनगर समाज बांधव सहभागी झाले होते. .हदगाव नगरीत जयमल्हार चा नारा गुंजत होता आता अमलबजावणी केल्या शिवाय हा लढा थांबणार नाही. ..आता धडक 4 आगष्ट नादेड कलेक्टर कार्यालयावर. ..

धनगर आरक्षण हक्क कृती समिती च्या वतीने नांदेड जिल्ह्य़ात सर्व 16तालुक्यात बारामती येथील उपोषण कर्त्यांचा सन्मानार्थ व उपोषण थांबले तरी आम्ही थांबलो नाही हे शासनकर्तेदाखुन देण्यासाठी  मोर्चे काढले हदगाव येथे तहशील कार्यालय वर भव्य मोर्चा काढण्यात आला बायका मुला बाळासह धनगर समाज बांधव सहभागी झाले होते. .हदगाव नगरीत जयमल्हार चा नारा गुंजत होताआता अमलबजावणी केल्या शिवाय हा लढा थांबणार नाही. ..आता धडक 4 आगष्ट  नादेड कलेक्टर कार्यालयावर. ..

विद्यार्थ्यांना दिला यशाचा मंत्र

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यवतमाळ : ध्येयाप्रती प्रामाणिक राहून उद्दिष्ट साध्य केल्यास विकास शक्य आहे. मात्र, त्याला राजाश्रयही महत्वाचा आहे. नव्या काळाची आव्हाने ओळखत आता कुणब्यांनी शासनकर्ती जमात व्हावे, असे प्रतिपादन ओबीसी आरक्षण सर्मथक कुणबी परिषदेचे अमरावती जिल्हाध्यक्ष प्रा. गजानन कोरे यांनी केले. 
ओबीसी आरक्षण सर्मथक कुणबी परिषदेतर्फे शाहू महाराज जयंती पर्वावर रविवारी येथे आयोजित कुणबी समाजातील गुणवंतांच्या सत्कार कार्यक्रमात प्रमुख मार्गदर्शक म्हणून ते बोलत होते. अध्यक्षस्थानी ओबीसी आरक्षण सर्मथक कुणबी परिषदेचे यवतमाळ जिल्हाध्यक्ष प्रदीप वादाफळे होते. 
प्रमुख पाहूणे म्हणून विक्रीकर निरीक्षक प्रज्वल देशमूख, सतीश भोयर, नरेंद्र गद्रे, बाबाराव कामळे, राजू देशमूख, गार्गी गिरटकर, कल्पना नाकतोडे, विद्या ब्राम्हणकर, अंजली फेंडर आदी उपस्थित होते. 

कुणब्यांनी शासनकर्ती जमात व्हावेगजानन कोरे : विद्यार्थ्यांना दिला यशाचा मंत्रयवतमाळ : ध्येयाप्रती प्रामाणिक राहून उद्दिष्ट साध्य केल्यास विकास शक्य आहे. मात्र, त्याला राजाश्रयही महत्वाचा आहे. नव्या काळाची आव्हाने ओळखत आता कुणब्यांनी शासनकर्ती जमात व्हावे, असे प्रतिपादन ओबीसी आरक्षण सर्मथक कुणबी परिषदेचे अमरावती जिल्हाध्यक्ष प्रा. गजानन कोरे यांनी केले. ओबीसी आरक्षण सर्मथक कुणबी परिषदेतर्फे शाहू महाराज जयंती पर्वावर रविवारी येथे आयोजित कुणबी समाजातील गुणवंतांच्या सत्कार कार्यक्रमात प्रमुख मार्गदर्शक म्हणून ते बोलत होते. अध्यक्षस्थानी ओबीसी आरक्षण सर्मथक कुणबी परिषदेचे यवतमाळ जिल्हाध्यक्ष प्रदीप वादाफळे होते. प्रमुख पाहूणे म्हणून विक्रीकर निरीक्षक प्रज्वल देशमूख, सतीश भोयर, नरेंद्र गद्रे, बाबाराव कामळे, राजू देशमूख, गार्गी गिरटकर, कल्पना नाकतोडे, विद्या ब्राम्हणकर, अंजली फेंडर आदी उपस्थित होते. प्रा. गजानन कोरे पुढे म्हणाले, शासनात कुणबी समाजाचा टक्का वाढला असला तरी, प्रशासनात मात्र कमी झाला आहे. समाजाच्या भरवशावर मोठे झालेले पुढारी बांधिलकी विसरले आहेत. त्यांना त्याची जाणीव करून देण्याबरोबरच प्रशासनात मोक्याच्या जागा हस्तगत करण्याचा युवा पिढीने आणि बेरोजगारांनी प्रयत्न केला पाहिजे. त्यासाठी युवा पिढीने स्पर्धा परीक्षेची कास धरली पाहिजे, असे आवाहनात्मक प्रतिपादन त्यांनी केले. यावेळी उपस्थित मान्यवरांनी राजर्षी शाहू महाराजांचे जीवनकार्य आणि विचारांवर आपल्या भाषणातून प्रकाश टाकला. या कार्यक्रमात कुणबी समाजातील १0 वी आणि १२ वीच्या परीक्षेत गुणवत्तेत आलेल्या ३६ विद्यार्थ्यांचा सत्कार करण्यात आला. कार्यक्रमाची सुरुवात मान्यवरांच्या हस्ते शाहू महाराजांचे प्रतिमा पूजन आणि दीप प्रज्वलनाने झाली. यशस्वीतेसाठी प्रकाश फेंडर, विशाल चुटे आदींनी प्रयत्न केले. (स्थानिक प्रतिनिधी)


प्रा. गजानन कोरे पुढे म्हणाले, शासनात कुणबी समाजाचा टक्का वाढला असला तरी, प्रशासनात मात्र कमी झाला आहे. समाजाच्या भरवशावर मोठे झालेले पुढारी बांधिलकी विसरले आहेत. त्यांना त्याची जाणीव करून देण्याबरोबरच प्रशासनात मोक्याच्या जागा हस्तगत करण्याचा युवा पिढीने आणि बेरोजगारांनी प्रयत्न केला पाहिजे. त्यासाठी युवा पिढीने स्पर्धा परीक्षेची कास धरली पाहिजे, असे आवाहनात्मक प्रतिपादन त्यांनी केले. 
यावेळी उपस्थित मान्यवरांनी राजर्षी शाहू महाराजांचे जीवनकार्य आणि विचारांवर आपल्या भाषणातून प्रकाश टाकला. या कार्यक्रमात कुणबी समाजातील १0 वी आणि १२ वीच्या परीक्षेत गुणवत्तेत आलेल्या ३६ विद्यार्थ्यांचा सत्कार करण्यात आला. कार्यक्रमाची सुरुवात मान्यवरांच्या हस्ते शाहू महाराजांचे प्रतिमा पूजन आणि दीप प्रज्वलनाने झाली. यशस्वीतेसाठी प्रकाश फेंडर, विशाल चुटे आदींनी प्रयत्न केले.

धनगर आरक्षण हक्का विषयी

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धनगर आरक्षण हक्का विषयी चर्चा झाली धनगर समाज आदिवासी ची लक्षणे पुर्ण करतो का? असे वारंवार म्हणत होते हे ढेरे व इतर समाजशास्त्रज्ञांने मांडलेच आहे धनगर समाज मुख्य प्रवाहात असलेल्या समाजा पेक्षा भिन्न आहेच त्याचे दगड
धोड्याचे देव आहेत बिरोबा ,मायंबा, खंडोबा हे त्याचे देव आहेत , परंपरा वेगळ्या आहेत कावड, काठ्या, धनगर ओव्या, गज नृत्य, पाड्या वाड्यानं राहणारा ,

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2)धनगर ही एक जात
नाही जमातच आहे धनगर या सदरात महाराष्ट्रात 25 उप जाती आहेत जसे हटकर, खुटेकर, बंडगर, बंडगे धनगर सलगर ,झेंडे, भारतात या जमातीला कुरबा, गड्डी, गडेरीया, बघेल, पाल, आदी नावाने ओळखले जाते
3) धनगर धनगड ही प्रिंट मिस्टेक नाही तो भाषिक लिखान बदल आहे 
जसे आपण ओडीसा लाओरिसा म्हणतो आनाडी चित्रपटाचे अनारी पोस्टर होते इंग्रजी त र चा ड होतो
4) महाराष्ट्रातील धनगरांची संख्या दाखवुन एस टी बजेट मध्ये वाटा कसाच्या आधारे उचलला जातो?
5)धनगर समाज धनाचा आगर होता कुण्या काळात जेव्हा पशुला धन मानलं जायाचं वस्तू विनीमय होता
कालांतरानं कुरणं कमी झाली चाराचं
राहीला नाही त्त्याच धन कसं राहील त्याची दशा झाली वत्याच्या उपजाती झाल्या
6) पूरके बोबलंत होते सर्वच समाजात
ऊथान झालीत आदीवासी का आजही
अंगाला पाला गूंडाळूनच जगतात का?
7)एका जातीला 3. 5 % आरक्षण आहे पुरके बोबलंत होते त्यात 25
उपजाती सह कोण सांगावं? एन टी आरक्षणच घटनाबाह्य आहे कारण आगोदरच एस टी असतांना त्याना भटके कसे ठरवता धनगर पुर्ण भटके नाहीत सेमी आहेत
8) कालेलकर आयोग, मंडल आयोग , न्यायालयाचा निकाल,1989 संसदेत धनगर धनगड एकच असल्याची प्रश्न ला उत्तर देताना तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री रामविलास पासवान यांनी माहिती दिली.कितीतरी पुरावे सादर केले आहेत

आम्ही बाबासाहेबांनी धनगरांना दिलेला घटनेतला हक्क मागतो 63 वर्षा पासून आमची दिशाभुल पध्दतशीरपणे केली आमच्या या येड्या धनगराला कळलच नाही  आता आम्ही जागे झालो आता आमचा हक्क घेतल्या शिवाय राहाणार नाही
धनगर नेते हो माडणी व्यवस्थित करा तूमच्या येडेपणाचा प्रत्येय आनु नका संजय सोनवणी सारख्या अभ्यासू विचारवंताना सोबत घ्या विजय आपला नक्की आहे.यासरकारला न्याय करण्याची सद्बबुध्दी मायंबा, खंडोबा, बिरोबा देवो

जयमल्हार

शालीमार पेंट्स में काम स्थगित

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बंगाल में बंद कल कारखानों को खुलवाने के संकल्प के साथ मां मानुष माटी की सरकार सत्ता में आया।बंद कल कारखाने तो खुल नहीं रहे हैं,लेकिन चालू औद्योगिक इकाइयां बंद होने लगी हैं।इसी सिलसिले में नया नाम जुड़ा है शालीमार पेंट्स का।बाजार में रंग बनाने वाली नयी कंपनियों के मुकाबले शालीमार लगातार बेरंग होता रहा और अब उसके बंद हो जाने से एक सदी पुरानी इस कंपनी के शानदार इतिहास का लगभग पटाक्षेप हो गया।कर्मचारी सदमे में हैं और राज्य सरकार की तरफ से कोई पहल अभी हो नहीं पायी है जबकि प्रबंधन का कहना है कि लगातार चार महीने से कारखाना चालू रखने की कवायद के बावजूद,कर्मचारियों को वेतन भुगतान जारी रखने के बावजूद वे आगे काम जारी रखने में असमर्थ है।प्रबंधन के इस आकस्मिक निर्णय से गुस्से में हैं कर्मचारी।

--------- एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

शालीमार पेंट्स लिमिटेड ने बुधवार को हावड़ा में अपनी फैक्ट्री में काम स्थगित कर दिया जिससे करीब 350 कामगारों के प्रभावित होने की आशंका है। आज सुबह जब कामगार काम करने फैक्ट्री पहुंचे तो उन्हें दरवाजे पर यह नोटिस चिपका हुआ मिला। कंपनी ने एक बयान में कहा गया है, 'मार्च 2014 में हावड़ा फैक्ट्री में आग लग गई थी, हमने पचिालन शुरू करने की सारी कोशिश कीं इस दौरान हमने अपने कामगारों को पूरा वेतन दिया।

      हालांकि संयंत्र चालू करने में अनिश्चितकालीन देरी के कारण हम परिचालन स्थगित करने के लिए बाध्य हैं। कर्मचारियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हमने उन्हें देश में अपने दूसरे संयंत्रों और डिपो में रोजगार देने की पेशकश की है। यह कहने की जरूरत नहीं कि शालीमार पश्चिम बंगाल के प्रति प्रतिबद्ध है और हमारे सभी कदम राज्य में उपस्थिति बढ़ाने को लेकर है। हाल के समय में पश्चिम बंगाल में कई कंपनियों को अपना परिचालन रोकना पड़ा है।

ओबीसी च्या जातीनिहाय जनगणना करण्यासाठी

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अन्ना हजारे चे उपोषण मिडीया ने उचलले होते कारण त्याच्या समातंर ओबीसी च्या जातीनिहाय जनगणना करण्यासाठी आदोलन सुरू होते, आता बारामती ला नभुतोन् बारामती करांनी कधीही न अनुभवलेला धनगर समाजाच्या आरक्षण मागणीचा मोर्चा काढण्यात आला होता ,मिडीया ने म्हणावी तशी दखल घेतली नाही (आय बी एन लोकमत सोडून) आता अमरण उपोषणाला लोक बसले आहेत


अन्ना हजारे चे उपोषण मिडीया नेउचलले होते कारण त्याच्या समातंरओबीसी च्या जातीनिहाय जनगणना करण्यासाठी आदोलन सुरू होते, आता बारामती ला नभुतोन् बारामती करांनी कधीही न अनुभवलेला धनगर समाजाच्या आरक्षण मागणीचा मोर्चा काढण्यात आला होता ,मिडीया ने म्हणावी तशी दखल घेतली नाही (आय बी एन लोकमत सोडून) आता अमरण उपोषणाला लोक बसले आहेतबारामती ला   त्याचे कव्हरेज  मिडीया का घेत नाही? चला धनगरांनो या मिडीयाच्या विरुध्द यल्गार पुकारा,जाहीर निषेध नोंदवा,  आपले बांधवप्राणांची आहुती देण्यासाठी सज्ज झाले आहेत ....मिडीयाने या उपोषणाची दखल घेतली नाही तर येत्या 25 तारखे पासून धनगरांच्या घरातून मराठी चॅनल कायमचे बंद होतील. .. तंटा नाही तर घंटा नाही. .धनगर जे बोलते ते करून दाखवणारचं? काय खरं हाय ना. .!धनगरांनो अख्खा भारताला हे कळू द्या


बारामती ला त्याचे कव्हरेज मिडीया का घेत नाही? चला धनगरांनो या मिडीयाच्या विरुध्द यल्गार पुकारा
,जाहीर निषेध नोंदवा, आपले बांधव प्राणांची आहुती देण्यासाठी सज्ज झाले आहेत ....मिडीयाने या उपोषणाची दखल घेतली नाही तर येत्या 25 तारखे पासून धनगरांच्या घरातून मराठी चॅनल कायमचे बंद होतील. .. तंटा नाही तर घंटा नाही. .धनगर जे बोलते ते करून दाखवणारचं? काय खरं हाय ना. .!धनगरांनो अख्खा भारताला हे कळू द्या


चेहर्यांवर फुलले हसू

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समाजाचे हसू बनलेल्या १२ चेहर्यांवर फुलले हसू

चेहर्यावरील व्यंग दुरुस्तीसाठी सोशल नेटवर्किंग फोरमच्या वतीने मोफत शस्त्रक्रिया शिबीर संपन्न ...

मार्च महिन्यात सोशल नेटवर्किंग फोरम च्या वतीने स्वित्झरलँड येथील स्विस क्लेफ्ट सेंटर आणि मुंबईच्या ग्लोबल हॉस्पिटल यांच्या सहकार्याने जन्मतःच चेहर्यावर व्यंग असणार्या बालकांसाठी आणि मोठ्या व्यक्तींसाठी मोफत शस्त्रक्रिया शिबिराचे आयोजन केले होते. स्वतःच्या चेहर्यावरील हास्य गमावून समाजाचे हसू बनलेल्या दुर्दैवी व्यक्तींसाठी हे शिबीर अतिशय मोलाचे ठरले आहे.

समाजाचे हसू बनलेल्या १२ चेहर्यांवर फुलले हसू चेहर्यावरील व्यंग दुरुस्तीसाठी सोशल नेटवर्किंग फोरमच्या वतीने मोफत शस्त्रक्रिया शिबीर संपन्न ...मार्च महिन्यात सोशल नेटवर्किंग फोरम च्या वतीने स्वित्झरलँड येथील स्विस क्लेफ्ट सेंटर आणि मुंबईच्या ग्लोबल हॉस्पिटल यांच्या सहकार्याने जन्मतःच चेहर्यावर व्यंग असणार्या बालकांसाठी आणि मोठ्या व्यक्तींसाठी मोफत शस्त्रक्रिया शिबिराचे आयोजन केले होते. स्वतःच्या चेहर्यावरील हास्य गमावून समाजाचे हसू बनलेल्या दुर्दैवी व्यक्तींसाठी हे शिबीर अतिशय मोलाचे ठरले आहे. जन्मतःच ओठ-टाळू फाटलेला असणे, शरीराच्या दर्शनी भागावर ट्युमर असणे, चेहरा वेडा वाकडा असणे अशा ३४ व्यक्तींची मे महिन्यात घेण्यात आलेल्या प्राथमिक शिबिरात तपासणी करण्यात आली. यातील १२ पेशंट्स वर शास्त्रक्रिया करणे शक्य असल्याचा अभिप्राय डॉक्टर्स च्या टीम ने दिल्यावर या सर्वांचे मुंबई येथे अंतिम चेक अप करण्यात आले. त्यानंतर गेली दोन महिने रुग्णांच्या सोयीने मुंबई येथे शस्त्रक्रिया करण्यात येत आहेत.यातील काही रुग्ण ओप्रेशन नंतर भेटले तेंव्हा त्यकनहा चेहर्यावरील हास्य खूप आनंद आणि समाधान देऊन गेले.. अर्थातच या कार्याचे सर्व श्रेय त्या शेकडो मित्रांना ज्यांनी १८ मार्च ची पोस्ट शेअर केली आणि जास्तीत जास्त लोकांपर्यंत या शिबिराची माहिती पोहोचवली. त्यातून अनेक पेशंट्स आमच्या पर्यंत पोहोचू शकले. .या निमित्ताने आपण कुठल्या तरी प्रक्षोभक पोस्ट शेअर करून सामाजिक सलोखा बिघडवायचा की अशा सामाजिक उन्नतीच्या पोस्ट शेअर करून समजाला सकारात्मक संदेश द्यायचा हेही पुन्हा एकदा अधोरेखित झाले आहे. .म्हणूनच अप्रत्यक्षरित्या या पवित्र कार्याचे जनक असलेल्या फेसबुकवरील सर्व मित्रांचे सोशल नेटवर्किंग फॉर सोशल कॉज टीमच्या वतीने मनपूर्वक धन्यवाद...!!!!Feeling really happy ..... Great work done friends .... !!!!!!

जन्मतःच ओठ-टाळू फाटलेला असणे, शरीराच्या दर्शनी भागावर ट्युमर असणे, चेहरा वेडा वाकडा असणे अशा ३४ व्यक्तींची मे महिन्यात घेण्यात आलेल्या प्राथमिक शिबिरात तपासणी करण्यात आली. यातील १२ पेशंट्स वर शास्त्रक्रिया करणे शक्य असल्याचा अभिप्राय डॉक्टर्स च्या टीम ने दिल्यावर या सर्वांचे मुंबई येथे अंतिम चेक अप करण्यात आले. त्यानंतर गेली दोन महिने रुग्णांच्या सोयीने मुंबई येथे शस्त्रक्रिया करण्यात येत आहेत.

यातील काही रुग्ण ओप्रेशन नंतर भेटले तेंव्हा त्यकनहा चेहर्यावरील हास्य खूप आनंद आणि समाधान देऊन गेले.. 
अर्थातच या कार्याचे सर्व श्रेय त्या शेकडो मित्रांना ज्यांनी १८ मार्च ची पोस्ट शेअर केली आणि जास्तीत जास्त लोकांपर्यंत या शिबिराची माहिती पोहोचवली. त्यातून अनेक पेशंट्स आमच्या पर्यंत पोहोचू शकले. .
या निमित्ताने आपण कुठल्या तरी प्रक्षोभक पोस्ट शेअर करून सामाजिक सलोखा बिघडवायचा की अशा सामाजिक उन्नतीच्या पोस्ट शेअर करून समजाला सकारात्मक संदेश द्यायचा हेही पुन्हा एकदा अधोरेखित झाले आहे. .
म्हणूनच अप्रत्यक्षरित्या या पवित्र कार्याचे जनक असलेल्या फेसबुकवरील सर्व मित्रांचे सोशल नेटवर्किंग फॉर सोशल कॉज टीमच्या वतीने मनपूर्वक धन्यवाद...!!!!

मिडीयावाले,हा जन समुदाय

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कुठे गेले मिडीयावाले,हा जन समुदाय
दिसत नाही का? कुत्रे मांजराच्या बातम्या चवीने दाखविणार्याना 
माणसांच्या व्यथा दिसत नाहीत. ..

मराठी मिडीयाने जर बातमी दाखविली नाही तर बांधवानो तुम्हाला आन आहे
अहिल्या मातेची 22 तारखेपासून मराठी चॅनल आपल्या घरातुन कायमचे बंद करा. ..

कुठे गेले मिडीयावाले,हा जन समुदायदिसत नाही का?  कुत्रे मांजराच्या बातम्या चवीने दाखविणार्याना  माणसांच्या व्यथा दिसत नाहीत. ..मराठी मिडीयाने जर बातमी दाखविली नाही तर बांधवानो तुम्हाला आन आहेअहिल्या मातेची 22 तारखेपासून मराठी चॅनल आपल्या घरातुन कायमचे बंद करा. ..